Gen Z Movement BJP Daughters: जंतर-मंतर पर चले 37 दिनों के आंदोलन ने बीजेपी नेताओं के घरों तक दस्तक दे दी। असम मंत्री की बेटी, ओडिशा सांसद की बेटी और यूपी के पूर्व विधायक की बेटी—जानिए कैसे ये तीन ‘बाग़ी’ बेटियाँ सुर्खियों में आईं।
नई दिल्ली/गुवाहाटी/भुवनेश्वर, 30 जुलाई 2026: दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में चले 37 दिनों के जेन ज़ी आंदोलन ने सिर्फ सड़कों पर ही नहीं, बल्कि सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के घरों के भीतर भी हलचल मचा दी। जहाँ एक ओर बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मुरली मनोहर जोशी ने पुलिस की सख्ती पर सवाल उठाए, वहीं तीन राज्यों में बीजेपी और उसकी सहयोगी पार्टियों के शीर्ष नेताओं की बेटियाँ खुलकर आंदोलन के समर्थन में उतर आईं—ठीक उसी जेन-ज़ी पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हुए जिसके लिए यह आंदोलन खड़ा हुआ था।

मुरली मनोहर जोशी ने भी उठाए सवाल
23 जुलाई को अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में शिक्षा मंत्री रहे मुरली मनोहर जोशी ने युवाओं के साथ पुलिस की सख्ती पर कहा:
“मुझे यह देखकर अत्यंत पीड़ा हुई है कि महिलाओं पर निर्मम बल प्रयोग किया गया।”
1.यशस्विनी राजे सिंह—फ़तेहपुर से दिल्ली तक की बाग़ी आवाज़
उत्तर प्रदेश के फ़तेहपुर सदर विधानसभा क्षेत्र से दो बार बीजेपी विधायक रहे विक्रम सिंह की बेटी यशस्विनी राजे सिंह सोशल मीडिया पर लगातार पार्टी लाइन से अलग खड़ी रही हैं।
29 जुलाई को अल जज़ीरा से बातचीत में यशस्विनी ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर तीखी टिप्पणी की:
“इस्तीफे को निर्णायक मोड़ के रूप में देखना बहुत अदूरदर्शी है। त्यागपत्र की भाषा में पछतावा जैसी कोई चीज़ नहीं है। जवाबदेही बिल्कुल नहीं है। उसकी भाषा ऐसी है, जैसे उन्होंने शहादत दी हो।”
CJP की रणनीति पर उन्होंने कहा, “सीजेपी ने बड़ी संख्या में ग़ैर-राजनीतिक लोगों को एकजुट करने का बेहतरीन काम किया। उनका मुख्य फोकस इंस्टाग्राम था, जो बहुत बढ़िया था क्योंकि वहीं पर आम लोगों के विरोध प्रदर्शन का इतना कवरेज देखा।”
अपने पिता की राजनीति से अलग राह
अपने पिता के बीजेपी में होने और स्वयं अलग राह चुनने पर यशस्विनी ने स्पष्ट कहा:
“मैं ढोंगी या पाखंडी नहीं हूँ। मैं आर्थिक रूप से किसी पर निर्भर नहीं। पिछले साढ़े तीन साल से भारत में अकेली रह रही हूँ। सालों से फ़तेहपुर नहीं गई। मैं उन सब बातों और ख़ुद के बीच एक बहुत बड़ी दूरी बनाए रखती हूँ।”
2.दिबीसा महंता—असम सरकार के मंत्री की बेटी का खुला विद्रोह
केशव महंता असम सरकार में राजस्व मंत्री हैं और असम गण परिषद (AGP) के वरिष्ठ नेता हैं—वही AGP जो राज्य में बीजेपी के नेतृत्व वाली NDA सरकार का सहयोगी है। उनकी बेटी दिबीसा महंता गुवाहाटी में CJP के समर्थन में हुए प्रदर्शन में शामिल हुईं और प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ नारे लगाए।
दिबीसा कहती हैं:
“यह बहुत दुखद है। छात्र सिर्फ शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना चाहते थे, लेकिन वह इतना हिंसक हो गया। लाठीचार्ज हुआ, आंसू गैस छोड़ी गई। उस दिन वहाँ पहुँचे हर छात्र पर मुझे गर्व है। उन्होंने जिस तरह बहादुरी दिखाई, उसने मुझे यहाँ आकर उनके साथ खड़े होने की प्रेरणा दी।”
हिमंता बिस्वा सरमा की प्रतिक्रिया
जब असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा से इस बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा:
“मेरे बच्चे क्या कहते हैं, उसके लिए मैं कैसे जवाबदेह हो सकता हूँ? मेरा अपना भाई भी मेरी किसी बात से सहमत नहीं होता। जब बच्चे बड़े होकर वयस्क हो जाते हैं, तो उनके कामों को उनके माता-पिता से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। उसने जो कहा, वह ग़लत था, लेकिन उसके पिता को क्यों परेशान किया जाए?”
3.अर्चिता सचिन राहर—BJP सांसद की बेटी का इंस्टाग्राम विद्रोह
ओडिशा से दो बार की बीजेपी सांसद और पूर्व IAS अधिकारी अपराजिता सारंगी की बेटी अर्चिता सचिन राहर का मामला सबसे विवादास्पद रहा। अर्चिता ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर इंस्टाग्राम स्टोरी में तिरंगे के इमोजी के साथ लिखा:
“जय हिंद! नीट पेपर लीक को लेकर हुए बड़े छात्र आंदोलन के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया।”
पार्टी में नाराज़गी और माँ की सफ़ाई
बीजेपी नेता जगन्नाथ प्रधान ने तीखी प्रतिक्रिया दी, “अपराजिता सारंगी को अपने परिवार के सदस्यों पर नियंत्रण रखना चाहिए। उनकी बेटी ने धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ जो प्रतिकूल टिप्पणी की, उसके लिए उन्हें ओडिशा की जनता से माफी मांगनी चाहिए।”
अपराजिता सारंगी ने बेटी का बचाव करते हुए कहा, “अर्चिता जेन-ज़ी है और उसने अपने दोस्तों के साथ मिलकर यह स्टोरी साझा की थी। जब मैंने उससे पूछा तो उसे अपनी गलती का अहसास हुआ और उसने इसे हटा दिया। यह अनजाने में पोस्ट हो गई थी।”
हालाँकि, स्टोरी हटाने से पहले अर्चिता ने एक और पोस्ट किया था: “डीपी के पीए के लिए, जो निश्चित रूप से मेरी माँ को मैसेज करके मुझसे पिछली स्टोरी हटाने के लिए कहेंगे—परेशान मत होइए। मैं इसे नहीं हटाऊंगी। जय जगन्नाथ! जय हिंद।”
क्या कहता है यह बदलाव?
तीनों बेटियाँ—यशस्विनी, दिबीसा और अर्चिता—जेन-ज़ी पीढ़ी (1997-2012 के बीच जन्म) का प्रतिनिधित्व करती हैं। इनका खुला विद्रोह यह दर्शाता है कि:

- सोशल मीडिया की ताक़त: तीनों ने इंस्टाग्राम, वीडियो और डिजिटल प्लेटफॉर्म के ज़रिए अपनी बात रखी।
- पारिवारिक राजनीति से स्वतंत्र पहचान: आर्थिक और वैचारिक रूप से अपने राजनीतिक परिवारों से अलग राह चुनने का साहस दिखाया।
- जेन ज़ी आंदोलन की व्यापकता: यह आंदोलन केवल किसी एक विचारधारा तक सीमित नहीं रहा; इसने सत्ता पक्ष के घरों के भीतर भी अपनी जगह बनाई।