फाल्टा विधानसभा सीट पर 21 मई को होने वाले पुनर्मतदान से TMC उम्मीदवार जहांगीर ख़ान के हटने से सियासी तूफान. शुभेंदु अधिकारी ने कहा- पोलिंग एजेंट न मिलने पर भागे. टीएमसी ने 100 से अधिक कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी का आरोप लगाया. पढ़ें पूरी इनसाइड स्टोरी.

फाल्टा चुनाव से जहांगीर ख़ान पीछे हटे, शुभेंदु बोले- भाग खड़े हुए; टीएमसी ने BJP पर लगाए गंभीर आरोप
कोलकाता, 19 मई 2026: पश्चिम बंगाल में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत के बाद भी चुनावी रस्म पूरी नहीं हुई है। दक्षिण 24 परगना की बहुचर्चित फाल्टा विधानसभा सीट पर 21 मई को होने वाले पुनर्मतदान से ठीक पहले तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार जहांगीर ख़ान के चुनावी मैदान से हटने की घोषणा ने सियासत गरमा दी है। राज्य के नए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “जहांगीर ख़ान भाग खड़े हुए हैं।”
जहांगीर ख़ान ने अचानक क्यों छोड़ा चुनावी मैदान?
रविवार को जहांगीर ख़ान ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, “मैं फाल्टा का बेटा हूं और मैं चाहता हूं कि फाल्टा में शांति हो और यह विकास करे।” उन्होंने इसके साथ ही मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की तारीफ करते हुए दावा किया कि “हमारे मुख्यमंत्री फाल्टा के विकास के लिए एक ख़ास पैकेज दे रहे हैं, जिस वजह से मैं ख़ुद को दोबारा होने वाले मतदान से अलग कर रहा हूं।”
शुभेंदु अधिकारी का तंज: ‘कोई पोलिंग एजेंट नहीं मिला’
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, जहांगीर ख़ान की घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कटाक्ष किया, “जहांगीर ख़ान भाग खड़े हुए हैं क्योंकि उन्हें कोई पोलिंग एजेंट नहीं मिल रहा है।” बीजेपी का इशारा साफ है कि 4 मई के नतीजों के बाद टीएमसी का ज़मीनी ढांचा ध्वस्त हो चुका है और इलाके में उनका जनाधार खिसक गया है।

टीएमसी का पलटवार: ‘यह पार्टी का फ़ैसला नहीं, बीजेपी ने आतंक मचाया’
टीएमसी ने तुरंत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बयान जारी कर सफाई दी। पार्टी ने कहा:
“जहांगीर ख़ान का फाल्टा में दोबारा हो रहे मतदान से हटने का फ़ैसला उनका अपना फ़ैसला है, पार्टी का नहीं है।”
टीएमसी ने आगे बड़ा आरोप लगाया कि 4 मई के नतीजों के बाद अकेले फाल्टा विधानसभा क्षेत्र में पार्टी के 100 से अधिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया जा चुका है। पार्टी ने दावा किया, “कई पार्टी ऑफिसों में दिनदहाड़े तोड़-फोड़ कर ज़बरदस्ती कब्ज़ा किया गया, लेकिन चुनाव आयोग आंखें मूंदे हुए है।” टीएमसी ने इसे स्पष्ट रूप से “एजेंसियों और प्रशासन के ज़रिए बीजेपी की धमकी” बताया, हालांकि उन्होंने यह भी माना कि दबाव में आकर कुछ लोगों ने मैदान छोड़ने का निर्णय लिया।
क्या है फाल्टा विवाद की पूरी कहानी?
अजयपाल शर्मा का वो वीडियो जिसने मचाया था बवाल
फाल्टा सीट लंबे समय से सुर्खियों में है। चुनाव प्रचार के दौरान ही बीजेपी लगातार आरोप लगा रही थी कि जहांगीर ख़ान स्थानीय लोगों पर अत्याचार करते हैं। इसी बीच, फाल्टा के ऑब्जर्वर नियुक्त किए गए उत्तर प्रदेश के चर्चित आईपीएस अधिकारी अजयपाल शर्मा का एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें वह खुलेआम चेतावनी दे रहे थे:
“अच्छी तरह समझ लें… जहांगीर के घरवाले भी सुन लें। बार-बार ख़बरें आ रही हैं कि धमकाया जा रहा है। उसे बता देना, बाद में रोना-पछताना मत।”
इस वीडियो के बाद अखिलेश यादव समेत कई विपक्षी नेताओं ने शर्मा की निंदा की थी, लेकिन बीजेपी ने इसे निष्पक्षता का परिचायक बताया था।
चुनाव आयोग का री-पोलिंग का ऐतिहासिक फैसला
पश्चिम बंगाल में दो चरणों (23 और 29 अप्रैल) में हुए चुनाव के बाद आयोग ने फाल्टा के सभी 285 मतदान केंद्रों पर गड़बड़ियां पाते हुए पूरी सीट का मतदान रद्द कर दिया। 21 मई 2026 को यहां पुनर्मतदान होना है, जिसके नतीजे 24 मई को घोषित होंगे।
फाल्टा में अब किसके बीच मुकाबला?
जहांगीर ख़ान के हटने के बाद अब इस सीट पर मुख्य मुकाबला बीजेपी के देबांग्शु पांडा और कांग्रेस के अब्दुर रज़्ज़ाक मोल्ला के बीच माना जा रहा है। सीपीआई(एम) के संभू नाथ कुर्मी भी मैदान में हैं। हालांकि, ज़मीनी हकीकत यह है कि 207 सीटें जीत चुकी बीजेपी के लिए यह सीट प्रतिष्ठा का प्रश्न बन चुकी है, जबकि टीएमसी के हटने से यह चुनाव एकतरफा होता दिख रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जहांगीर ख़ान का ‘विकास पैकेज’ वाला बयान दबाव में लिया गया एक सुविधाजनक निर्णय है। फिलहाल पूरे प्रदेश की निगाहें 24 मई के नतीजों पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि बीजेपी अपना विजय रथ 208 सीटों तक ले जाती है या नहीं।