सोनम वांगचुक की ज़बरन अस्पताल में भर्ती, भूख हड़ताल जारी; अभिजीत दीपके ने जताई बड़ी आशंका


Sonam Wangchuk Hunger Strike: 21 दिन से भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर से उठाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया। पत्नी बोलीं- ‘न ड्रिप लेंगे, न दवा’। अभिजीत दीपके ने रात में पुलिस कार्रवाई की आशंका जताई। 20 जुलाई को संसद मार्च की तैयारी।

नई दिल्ली, 19 जुलाई 2026: नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ पिछले 21 दिनों से जंतर-मंतर पर आमरण अनशन कर रहे पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को शनिवार तड़के दिल्ली पुलिस ने ज़बरदस्ती उठाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती करा दिया। इस घटनाक्रम के बाद आंदोलन और तेज़ हो गया है। वांगचुक ने अस्पताल में किसी भी प्रकार का तरल पदार्थ या ड्रिप लेने से इनकार कर दिया है, जबकि कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने आशंका जताई है कि पुलिस रात में धरनास्थल पर फिर कार्रवाई कर सकती है।

कैसे हुई ज़बरदस्ती? प्रत्यक्षदर्शियों की ज़ुबानी

अभिजीत दीपके ने एक वीडियो संदेश में बताया कि जब वह सुबह सात बजे फ्रेश होने के लिए धरनास्थल से बाहर गए, तभी पुलिस ने कार्रवाई की। उन्होंने कहा:

“जब मैं सुबह सात बजे यहाँ से फ्रेश होने के लिए निकला, तभी पुलिस के लोग आए और सोनम सर को घसीटकर ले गए। भूख हड़ताल पर बैठे 60 साल के शख्स को पुलिस ज़बरदस्ती ले गई। पुलिस ने मेरे साथ भी मारपीट की।”

जंतर-मंतर पर मौजूद एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया, “सुबह-सुबह इन लोगों ने डॉक्टर की टीम बोलकर 10 पुलिसवालों को अंदर भेजा। हम समझ गए कि पुलिसवाले हैं क्योंकि वे डॉक्टर जैसे दिख नहीं रहे थे। पुलिसवालों ने प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट भी की।”

सोनम वांगचुक का ड्रिप-दवा से साफ इनकार

सफदरजंग अस्पताल द्वारा शनिवार रात जारी हेल्थ बुलेटिन के अनुसार:

“सोनम वांगचुक ने ड्रिप और मुँह से किसी भी तरह का तरल पदार्थ लेने से मना कर दिया है।”

अस्पताल प्रशासन के अनुसार, लंबे उपवास के कारण उनमें डिहाइड्रेशन और हल्की कमज़ोरी के लक्षण हैं, लेकिन पल्स, ब्लड प्रेशर और ऑक्सीजन सेचुरेशन स्थिर है। डॉ. चारु बंबा ने बताया कि “वह पूरी तरह होश में हैं और उनकी हालत स्थिर है।”

पत्नी गीतांजलि का बड़ा आरोप: ‘पारदर्शिता नहीं, शक हो रहा है’

सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. अंगमो ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए:

● “सफदरजंग की रिपोर्ट कहती है कि पोटैशियम लेवल 2.9 है, जबकि कल ही यह 4.3 था। वो न तो दूसरी लैब में जाँच की इजाज़त दे रहे हैं, न ही हमारी मौजूदगी में ब्लड सैंपल दे रहे हैं।”


● “पारदर्शिता की इस कमी से हमें शक हो रहा है। हमने तुरंत डिस्चार्ज की मांग की है ताकि हम उन्हें ऐसे अस्पताल ले जा सकें जहाँ बेहतर भरोसा हो।”


● “बिना सहमति के उनके मुँह या नसों के ज़रिए कुछ भी नहीं दिया जाए।”

गीतांजलि ने यह भी घोषणा की: “अगर सोनम मार्च में शामिल नहीं हो पाए, तो मैं उनकी जगह मार्च का नेतृत्व करूँगी।”

अभिजीत दीपके ने रात में पुलिस कार्रवाई की जताई आशंका

कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने समर्थकों से तत्काल जंतर-मंतर पहुँचने की अपील की:

“ऐसी बड़ी संभावना है कि पुलिस आज रात को हमें यहाँ से भी हटा सकती है। अगर आप सभी लोग यहाँ पर आ गए तो पुलिस की हिम्मत यहाँ से हटाने की नहीं होगी। सोनम सर से मेरी सुबह बात हुई और उन्होंने कहा है कि 20 जुलाई का मार्च हमें कामयाब बनाना है।”

CJP ने घोषणा की है कि 20 जुलाई को ‘संसद चलो’ मार्च तय कार्यक्रम के अनुसार निकाला जाएगा और अभिजीत दीपके बेमियादी भूख हड़ताल पर बैठेंगे।

दिल्ली पुलिस का बयान: ‘हाई कोर्ट के आदेश का पालन’

डीसीपी नई दिल्ली ने एक्स पर स्पष्टीकरण दिया:

“दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश और विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह के अनुसार, सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत को देखते हुए उन्हें ज़रूरी मेडिकल देखभाल के लिए अस्पताल ले जाया गया है। प्रदर्शनकारियों ने बाधा उत्पन्न करने की कोशिश की, जिससे हल्की अफरातफरी की स्थिति बनी। हम जंतर-मंतर पर मौजूद प्रदर्शनकारियों से अनुरोध करते हैं कि वे शांतिपूर्वक जगह खाली कर दें।”

विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रिया

संजय सिंह (AAP सांसद):

“ये क्या गुंडागर्दी चल रही है? मोदी जी, ये सत्ता का अहंकार लंबे समय तक नहीं चलता। जिस युवा पर लठ्ठ चला रहे हो, यही आपका तख्त उखाड़ेगा।”

डिंपल यादव (SP सांसद):

“सोनम वांगचुक जी को जबरन हटाना सिर्फ एक कार्रवाई नहीं, बल्कि लोकतंत्र और संविधान को कुचलना है। बीजेपी सरकार को अब शांतिपूर्ण विरोध भी बर्दाश्त नहीं। यह तानाशाही है।”

वांगचुक का आखिरी संदेश: ‘प्याज से भी बड़ा मुद्दा है शिक्षा’

शुक्रवार को जारी अपने अंतिम वीडियो संदेश में वांगचुक ने कहा था:

“हाँ, मैं अभी भी ज़िंदा हूँ। मेरे शरीर का 20 प्रतिशत हिस्सा खत्म हो चुका है। पहले चर्बी खत्म हुई, फिर मांसपेशियाँ। उसके बाद अंग प्रभावित होंगे। आखिर में दिमाग। अभी वह समय नहीं आया है।”

उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा, “भारत में तीन बार जन आंदोलन के कारण सरकारें गिरीं—1980 में केंद्र, 1998 में दिल्ली और राजस्थान। और वह आंदोलन किस बात पर था? प्याज की कीमतों पर। मैं आपसे पूछता हूँ, भारत के लोग अपने बच्चों की ज़िंदगी और शिक्षा से ज़्यादा प्यार करते हैं या प्याज से?”

क्या हैं आंदोलन की प्रमुख मांगें?

CJP 20 जून से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रही है। सोनम वांगचुक 28 जून को आंदोलन में शामिल हुए और तभी से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। प्रमुख मांगें:

  1. नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा
  2. कथित परीक्षा घोटालों की न्यायिक जाँच
  3. परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार

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