राहुल गांधी के धरने से AAP क्यों चिढ़ी? ‘कांग्रेस-BJP की मिलीभगत’ के आरोप पर छिड़ी बहस


Rahul Gandhi Dharna vs AAP: राहुल गांधी के PM आवास के बाहर धरने पर AAP ने कांग्रेस-BJP की मिलीभगत का आरोप लगाया। संजय सिंह, आतिशी के बयानों की चौतरफा आलोचना। स्वानंद किरकिरे से लेकर कीर्ति आज़ाद तक ने जताई नाराज़गी। जानिए पूरा विवाद।

नई दिल्ली, 22 जुलाई 2026: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के मंगलवार को प्रधानमंत्री आवास के बाहर अचानक धरने पर बैठने से जहाँ एक ओर सियासी पारा चढ़ गया, वहीं दूसरी ओर आम आदमी पार्टी (AAP) की तीखी प्रतिक्रिया ने विपक्षी एकता पर ही सवाल खड़े कर दिए। ‘आप’ नेताओं ने इस घटना को ‘कांग्रेस और BJP की मिलीभगत’ करार दिया, जिसके बाद सोशल मीडिया पर पार्टी को जमकर घेरा जा रहा है। गीतकार स्वानंद किरकिरे से लेकर TMC सांसद कीर्ति आज़ाद तक ने ‘आप’ के रुख पर नाराज़गी जताई है।

AAP ने क्या आरोप लगाए?

संजय सिंह का विवादित बयान

आप सांसद संजय सिंह ने एक्स पर लिखा कि “प्रधानमंत्री मोदी ने सीजेपी के आंदोलन को कमज़ोर करने के लिए राहुल गांधी को धरने पर बैठाया।” उनके इस आरोप पर राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक तीखी प्रतिक्रियाएँ आईं।

आतिशी का ‘मिलीभगत’ वाला आरोप

दिल्ली विधानसभा में विपक्ष की नेता आतिशी सिंह ने दोनों आंदोलनों की तुलना करते हुए कहा:

● “सरकार ने एक महीने तक चले सीजेपी और वांगचुक के आंदोलन के दौरान बातचीत से इनकार किया, लेकिन राहुल गांधी के प्रदर्शन के एक घंटे के भीतर कांग्रेस से संवाद शुरू कर दिया।”


● “जिस पुलिस ने सोमवार के संसद मार्च में सीजेपी के प्रदर्शनकारियों को 100 मीटर भी आगे नहीं बढ़ने दिया, उसी पुलिस ने राहुल गांधी को प्रधानमंत्री आवास तक पहुँचने दिया। यह इस बात का सबूत है कि कांग्रेस और बीजेपी एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।”


● “जो गोदी मीडिया एक महीने से सीजेपी के विरोध प्रदर्शन को एक मिनट भी टीवी पर नहीं चला रहा था, अब राहुल गांधी के एक घंटे के प्रोटेस्ट को लाइव चला रहा है। गोदी मीडिया ने बीजेपी-कांग्रेस की मिलीभगत का राज़ खोल ही दिया!”

‘आप’ की आलोचना में किसने क्या कहा?

स्वानंद किरकिरे (गीतकार):

“जैसा कि आपने आज ही कहा था, संसद उनके नाम नहीं की गई है, वैसे ही यह धरना भी किसी के नाम नहीं किया हुआ है। आंदोलन बच्चों का है। आप भी साथ खड़े हो जाइए। किसने रोका है? हम उन बच्चों के लिए नहीं लड़ रहे, वो हमारे लिए लड़ रहे हैं।”

कीर्ति आज़ाद (TMC सांसद):

“संजय सिंह आपसे ये उम्मीद नहीं थी। हमारी दोस्ती शर्मसार कर दी आपने।”

संजय झा (पूर्व कांग्रेस नेता):

“आम आदमी पार्टी की यह बेहद घटिया और ओछी पोस्ट शायद इस पार्टी को लेकर मेरी सबसे बड़ी आशंका को सही साबित करती है कि यह हमेशा एक उभरती हुई स्टार्ट-अप पार्टी बनकर ही रह जाएगी।”

निखिल वाग्ले (वरिष्ठ पत्रकार):

“कृपया यह बेमतलब की लड़ाई बंद कीजिए। मुद्दा इससे कहीं ज़्यादा बड़ा और अहम है। युवाओं को किसी भी राजनीतिक दल की परवाह नहीं है। इस तरह की राजनीति करके आप सिर्फ मोदी और बीजेपी की मदद कर रही हैं।”

कांग्रेस का पलटवार

कांग्रेस नेता श्रीनिवास बी.वी. ने संजय सिंह के आरोपों पर तंज कसते हुए लिखा, “इतना क्यों तिलमिला रहे हो? यह ट्वीट मालवीय ने लिखा है या चड्ढा ने?” उनका इशारा बीजेपी आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय और ‘आप’ से बीजेपी में शामिल हुए राघव चड्ढा की ओर था।

इस पर अमित मालवीय ने भी प्रतिक्रिया दी: “यह अब बिल्कुल स्पष्ट है कि प्रायोजित प्रदर्शन कभी छात्रों के लिए थे ही नहीं। कांग्रेस और आप इस आंदोलन का श्रेय लेने के लिए आपस में लड़ रहे हैं।”

विशेषज्ञ की राय: केजरीवाल को राहुल से क्यों है चुनौती?

पंजाब यूनिवर्सिटी में राजनीति विज्ञान के प्रोफ़ेसर आशुतोष कुमार कहते हैं:

“केजरीवाल ख़ुद को दिल्ली का नहीं बल्कि देश का नेता मानते हैं और उन्हें सबसे बड़ी चुनौती राहुल गांधी से ही मिलेगी। जब केजरीवाल 2014 में मोदी के खिलाफ बनारस से चुनाव लड़ने गए थे, तो यही संदेश देना था कि मोदी को वही चुनौती दे सकते हैं। लेकिन उन्हें समझना चाहिए कि विपक्ष बँटा तो फायदा उन्हें भी नहीं होगा।”

कांग्रेस और AAP का उतार-चढ़ाव भरा रिश्ता

दोनों दलों के रिश्तों का इतिहास विरोधाभासों से भरा है:

· 2013: अरविंद केजरीवाल ने अपने बच्चों की कसम खाई थी कि न तो बीजेपी और न ही कांग्रेस से गठबंधन करेंगे।


· 2013 का चुनाव: किसी को बहुमत नहीं मिला। आप ने ‘जनमत संग्रह’ का हवाला देकर कांग्रेस के समर्थन से सरकार बना ली और केजरीवाल मुख्यमंत्री बने।


· 2024 लोकसभा चुनाव: दोनों दल I.N.D.I.A. गठबंधन का हिस्सा रहे, लेकिन दिल्ली में सीट बँटवारे को लेकर तल्खी बनी रही।


· वर्तमान: सीजेपी के आंदोलन में AAP सक्रिय रही (केजरीवाल खुद कई बार जंतर-मंतर गए), जबकि कांग्रेस ने दो सप्ताह से अधिक समय तक लगभग खामोशी बनाए रखी। 17 जुलाई को पवन खेड़ा पहली बार आधिकारिक रूप से सोनम वांगचुक से मिलने पहुँचे।

पूर्व रणनीतिकार का एंगल

गौरतलब है कि सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके कभी AAP के सोशल मीडिया रणनीतिकार हुआ करते थे। उन्होंने और सीजेपी के अन्य नेताओं ने पहले भी कांग्रेस और राहुल गांधी की आलोचना की है और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की साझा मांग के बावजूद कांग्रेस के समर्थन को न तो विशेष रूप से स्वीकार किया और न ही आगे बढ़ाया।

खुद सोनम वांगचुक ने भी इस बात पर तंज कसा था कि राहुल गांधी उनसे मिलने नहीं आए, जबकि गुजरात कांग्रेस के नेता जिग्नेश मेवाणी ने राहुल का बचाव किया था। इस दौरान राहुल गांधी समानांतर रूप से ‘छात्रों की गूँज’ अभियान चला रहे थे।

निष्कर्ष: विपक्षी एकता की राह में रोड़ा?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि AAP का यह रुख विपक्षी एकता को कमज़ोर कर सकता है। एक ओर जहाँ बीजेपी विरोधी मोर्चे को मज़बूत करने की ज़रूरत है, वहीं कांग्रेस और AAP की आपसी खींचतान से सीधा लाभ सत्ता पक्ष को मिलता दिख रहा है। निखिल वाग्ले की चेतावनी—”इस तरह की राजनीति करके आप सिर्फ मोदी और बीजेपी की मदद कर रही हैं”—इस पूरे विवाद का सार प्रस्तुत करती है।

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