नेपाल के मधेश में कांवड़ यात्रा के दौरान सांप्रदायिक हिंसा, तीन की मौत; कर्फ्यू लागू


Nepal Communal Violence: मधेश के सुनसरी, सिरहा में कांवड़ यात्रा के दौरान भड़की सांप्रदायिक हिंसा में तीन लोगों की मौत। कई जिलों में कर्फ्यू, गृह मंत्री ने संभाला मोर्चा। बालेन शाह बोले—’नेपाल न तो हिंदू राष्ट्र बनेगा, न राजशाही लौटेगी’।

काठमांडू/सुनसरी, 01 अगस्त 2026: नेपाल के मधेश प्रांत में कांवड़ यात्रा की तैयारियों के दौरान दो धार्मिक समुदायों के बीच भड़की सांप्रदायिक हिंसा ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। इस झड़प में अब तक तीन लोगों की मौत हो चुकी है, जिसके बाद कोशी प्रांत के सुनसरी, धनुषा और सिरहा जैसे कई जिलों में कर्फ्यू लगाना पड़ा। हालाँकि, सर्वदलीय बैठक और गृह मंत्री के हस्तक्षेप के बाद अब हालात सामान्य होने की उम्मीद है।

हिंसा की शुरुआत कैसे हुई?

बीबीसी नेपाली सेवा के अनुसार, यह तनाव पिछले रविवार को सुनसरी जिले के देवगंज स्थित कप्तानगंज में उस वक्त शुरू हुआ, जब कांवड़ यात्रा की तैयारी कर रहे कुछ लोगों ने एक मुस्लिम बस्ती के पास स्थित शिव मंदिर के निकट बिजली के खंभों पर झंडे लगा दिए और तेज़ आवाज़ में डीजे बजाना शुरू कर दिया।

सुनसरी के सहायक मुख्य जिला अधिकारी पोषण लामिछाने ने बताया, “यह घटना कप्तानगंज की मुस्लिम बस्ती के पास मौजूद एक शिव मंदिर के पास हुई। तनाव झंडे और डीजे की वजह से पैदा हुआ।”

इसके बाद दोनों पक्षों के बीच झड़प हुई, जिसने देखते ही देखते उग्र रूप ले लिया। सुनसरी और देवगंज में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि सिरहा में एक और व्यक्ति की जान गई।

प्रशासन की त्वरित कार्रवाई

· गृह मंत्री सुदन गुरुंग ने तनाव प्रभावित सुनसरी और देवगंज का दौरा कर हालात को नियंत्रित करने का प्रयास किया।
· कई जिलों में सार्वजनिक स्थानों पर डीजे के इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई।
· धार्मिक और सार्वजनिक जुलूसों के दौरान हथियार या हथियार के रूप में इस्तेमाल हो सकने वाली वस्तुओं के प्रदर्शन पर प्रतिबंध लगा दिया गया।
· शुक्रवार दोपहर तक सुनसरी, धनुषा और सिरहा के कुछ इलाकों में नारेबाज़ी और रैलियों की खबरें आती रहीं।

सरकार और मृतकों के परिवारों के बीच समझौता

गृह मंत्री सुदन गुरुंग की ओर से मृतकों के परिवारों के साथ हुए समझौते में निम्नलिखित बातें शामिल हैं:

मुद्दा विवरण
शहीद का दर्जा मृतकों को शहीद घोषित करने की प्रक्रिया तुरंत शुरू
मुआवज़ा प्रत्येक मृतक के परिवार को 10 लाख रुपये
जाँच 20 जुलाई की रात की घटना की निष्पक्ष जाँच, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई
मदरसे की जाँच देवगंज-3 स्थित मदरसे की कानूनी स्थिति की तुरंत जाँच

गृह मंत्री गुरुंग ने पत्रकारों से कहा, “हमारे देश में अब तक दो धर्मों के लोगों के बीच कोई संघर्ष नहीं हुआ है। हम इस समस्या को जड़ से ख़त्म करने की ज़रूरत समझते हैं।”

‘भारत की नकल’—विशेषज्ञों की राय

चंद्र किशोर (तराई-मधेश मामलों के विश्लेषक) ने बीबीसी को बताया, “हाल के दिनों में दोनों समुदायों में त्योहारों पर बड़े पैमाने पर रैलियाँ, हथियारों का प्रदर्शन और शक्ति प्रदर्शन की प्रवृत्ति देखी जा रही है। यह अघोषित प्रतिस्पर्द्धा तराई के कई इलाकों में तनाव पैदा कर रही है।”

विनोद गुप्ता (बीरगंज कैंपस में शिक्षक) ने कहा, “ऐसा लगता है कि भारत में होने वाली गतिविधियों की नकल की जा रही है। निरक्षरता और गरीबी ऐसी घटनाओं को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं। अगर लोगों के पास काम होगा, तो कौन दंगों में शामिल होगा?”

उन्होंने यह भी कहा, “धार्मिक समुदाय भी इसे रोकने में भूमिका निभा सकते हैं। प्रशासन को ऐसी घटनाओं की पहले से जानकारी होती है; उसकी मंज़ूरी के बिना कोई रैली नहीं होनी चाहिए।”

बालेन शाह का स्पष्ट रुख: ‘नेपाल न तो हिंदू राष्ट्र बनेगा, न राजशाही लौटेगी’

प्रधानमंत्री बालेन शाह ने मधेश क्षेत्र के नेताओं के साथ लगभग दो घंटे चली बैठक में देश की राजनीतिक और धार्मिक दिशा पर उठ रहे सवालों का स्पष्ट जवाब दिया:

“राजा का संबंध हिंदू राष्ट्र से जुड़ा है और मौजूदा समय में यह ठीक नहीं है। मैं पद छोड़ने से पहले संघीय व्यवस्था के प्रति अपनी प्रतिबद्धता ज़रूर निभाऊंगा।”

उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग अपने स्वार्थ के लिए सांप्रदायिक दंगे भड़काने की कोशिश कर रहे हैं और सभी नेताओं से तराई-मधेश में शांति बनाए रखने की अपील की।

बाबूराम भट्टराई की दो टूक

पूर्व प्रधानमंत्री बाबूराम भट्टराई ने इस घटना पर गहरी चिंता जताई:

“पिछले कुछ दिनों से तराई-मधेश के कई हिस्सों में जारी सांप्रदायिक दंगे और हिंसा में जान-माल का भारी नुकसान हुआ है। जब भाई आपस में लड़ते हैं, तो दूसरे लोग उसका फ़ायदा उठा लेते हैं। सरकार, राजनीतिक दलों और सभी समुदायों के देशभक्त नागरिकों को एकजुट होकर इस संकट को टालना होगा।”

उन्होंने बालेन शाह के रुख की तारीफ करते हुए कहा, “प्रधानमंत्री का सही समय पर स्पष्टीकरण नई सरकार की गणतंत्र, संघीय व्यवस्था, धर्मनिरपेक्षता और समावेशिता के प्रति प्रतिबद्धता पर लोगों की शंकाओं को दूर करता है।”

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