‘दिल्ली प्रदर्शन में घायलों की चोटें पैलेट गन से लगने जैसी’—अंतरराष्ट्रीय बैलिस्टिक विशेषज्ञों का दावा


Delhi Protest Pellet Gun: ब्रिटिश बैलिस्टिक विशेषज्ञों ने BBC से कहा—20 जुलाई के प्रदर्शन में घायल CJP समर्थकों की चोटें 12-गेज शॉटगन के बर्डशॉट से लगी हैं। शरीर में 40 से अधिक छर्रे, एक की आँख खराब होने का खतरा। पढ़ें पूरी पड़ताल।

नई दिल्ली/लंदन, 02 अगस्त 2026: 20 जुलाई को दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा को लेकर एक नया और गंभीर खुलासा हुआ है। बीबीसी से बात करने वाले स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय बैलिस्टिक विशेषज्ञों ने घायल प्रदर्शनकारियों की तस्वीरों और एक्स-रे की जाँच के बाद दावा किया है कि उनकी चोटें पैलेट गन (12-गेज शॉटगन) से दागे गए बर्डशॉट (छर्रों) के कारण लगी हैं। दिल्ली पुलिस ने इन आरोपों को “पूरी तरह झूठा और गुमराह करने वाला” बताया था, लेकिन विशेषज्ञों की राय इसके विपरीत है।

विशेषज्ञों ने क्या कहा?

फिलिप बॉयस (ब्रिटेन स्थित बैलिस्टिक्स फोरेंसिक वैज्ञानिक):

“दिखाई गई चोटें निश्चित रूप से पैलेट गन से लगी हैं। इस्तेमाल किया गया हथियार 12-गेज पंप-एक्शन शॉटगन है। ये छर्रे के घाव वास्तव में काफी घातक हो सकते हैं, खासकर करीब से लगने पर। जो घाव मैंने देखे, वे कम से कम 50 फुट की दूरी से लगे हैं, लेकिन फिर भी 100 फुट की दूरी से भी ये संभावित रूप से जानलेवा हो सकते हैं।”

एनआर जेनज़ेन-जोन्स (आर्मामेंट रिसर्च सर्विसेज़, ब्रिटेन):

“प्रदर्शनों की तस्वीरों और वीडियो में पुलिस को भीड़ नियंत्रण के लिए शॉटगन का इस्तेमाल करते हुए देखा जा सकता है। घायलों की तस्वीरों में दिखने वाली चोटें बर्डशॉट के इस्तेमाल से होने वाली चोटों से काफी हद तक मेल खाती हैं। ये छर्रे सुरक्षित नहीं होते—ये ज़िंदगी हमेशा के लिए बदल सकते हैं, जानलेवा भी हो सकते हैं और शरीर में ज़हरीला सीसा छोड़ जाते हैं।”

क्या होती है पैलेट गन?

· यह एक प्रकार की शॉटगन होती है, जिसे मूलतः पक्षियों के शिकार के लिए बनाया गया था।


· इसमें ‘बर्डशॉट’ नामक कारतूस का इस्तेमाल होता है, जिसमें 200 से 400 तक छोटे धातु के छर्रे भरे होते हैं।
· भीड़ पर चलाए जाने पर ये छर्रे व्यापक दायरे में फैलते हैं और बिना किसी भेदभाव के लोगों को घायल करते हैं।
· कई देशों में इसके इस्तेमाल पर प्रतिबंध है।

भारत में सुरक्षा बलों द्वारा कश्मीर में 2010 से पैलेट गन का इस्तेमाल किया जा रहा है। ह्यूमन राइट्स वॉच के अनुसार, इससे हजारों लोग घायल हुए और कम से कम 17 लोगों की मौत हुई। दर्जनों लोग अंधे हो गए। यदि दिल्ली में इसके इस्तेमाल की पुष्टि होती है, तो राजधानी में नागरिकों पर यह पहला प्रयोग होगा।

तीन घायलों की दर्दनाक कहानी

  1. मोहित (28 वर्षीय पत्रकार, नाम परिवर्तित)

· कनॉट प्लेस के पास एक सुरक्षाकर्मी को बंदूक ताने देखा, भागते समय दाहिनी बांह और पीठ पर जलन महसूस हुई।
· एक्स-रे में शरीर के ऊपरी हिस्से में छोटे कण धंसे दिखे।
· मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार: दाहिनी कोहनी के पास 26 छर्रों के घाव, पीठ पर 4 घाव।
· डॉक्टरों ने सर्जरी से मना किया—स्थिति बिगड़ सकती है।
· “मुझे चिंता है कि ये कण आगे चलकर कितना नुकसान पहुँचाएँगे। लेकिन जब दूसरों के चेहरे पर लगी चोटें देखीं, तो लगा कि मैं खुशकिस्मत हूँ।”

  1. शेख इरशाद मंसूरी (गुरुग्राम की कंपनी में कार्यरत)

· आरएएफ जवान ने भीड़ की ओर बंदूक तानी, अचानक तेज़ आवाज़ हुई और छर्रे बाईं भौंह और ठुड्डी में लगे।
· जाँच में पता चला: शरीर में 40 से अधिक छर्रे।
· सर्जरी में 7 छर्रे निकाले गए, लेकिन गर्दन में फंसा छर्रा नहीं निकाला जा सका—बहुत जोखिम भरा था।
· “डॉक्टरों ने कहा—अब यह आपके शरीर का हिस्सा है। भरोसा दिलाया कि भविष्य में कोई खतरा नहीं होगा।”
· घटना के 10 दिन बाद भी दर्द महसूस होता है।

  1. साहिल लोचाब (19 वर्षीय DU छात्र)

· पुलिस भर्ती की रद्द परीक्षा के पीड़ित; तीन दोस्तों के साथ प्रदर्शन में गए थे।
· सुरक्षा बलों की ओर बढ़ते समय पैलेट लगी। दाहिनी आँख की रोशनी स्थायी रूप से जाने का खतरा।
· राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में उनकी टी-शर्ट उठाकर शरीर पर दर्जनों घाव दिखाए।
· “मैं खुद को रोक नहीं सका। मुझे इंसाफ चाहिए। जिसने भी मेरे साथ यह किया, वह सत्ता में रहने लायक नहीं।”

आधिकारिक पक्ष और विरोधाभास

पक्ष दावा
दिल्ली पुलिस आरोप “पूरी तरह झूठा और गुमराह करने वाला”, हमारे पास पैलेट गन थी ही नहीं
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह (संसद में) प्रदर्शन के दौरान कोई “गोली” नहीं चलाई गई; केवल आंसू गैस का इस्तेमाल
बीबीसी पड़ताल कम से कम 4 मामलों की पुष्टि, जहाँ अस्पतालों में पैलेट गन जैसी चोटों का इलाज हुआ
अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ चोटें निश्चित रूप से पैलेट गन/बर्डशॉट से लगी हैं

बीबीसी ने सीआरपीएफ प्रमुख ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह से संपर्क किया और ईमेल के जरिए सवाल भेजे, लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं मिला। गौरतलब है कि रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) सीआरपीएफ के अंतर्गत आती है।

पैलेट गन का घातक इतिहास

· 2010 से कश्मीर में सुरक्षा बलों द्वारा इस्तेमाल
· हजारों घायल, कम से कम 17 मौतें, दर्जनों अंधे
· ब्रिटेन में केवल पक्षियों के शिकार के लिए उपलब्ध; भीड़ नियंत्रण के लिए कभी इस्तेमाल नहीं किया गया
· विशेषज्ञों की चेतावनी: “ये सुरक्षित नहीं होते—शरीर में ज़हरीला सीसा छोड़ जाते हैं, जिसे सुरक्षित रूप से निकालना मुश्किल

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