Bihar Bypoll Results 2026: बांकीपुर में जन सुराज के प्रशांत किशोर 18,953 वोटों से आगे, BJP का 30 साल का किला खतरे में। दतिया में कांग्रेस ने BJP को हराया। मांजलपुर में BJP की जीत। पूरे नतीजों का गहन विश्लेषण पढ़ें।
बांकीपुर (बिहार): प्रशांत किशोर का ‘डेविड बनाम गोलियथ’ पल
पटना/भोपाल/अहमदाबाद, 03 अगस्त 2026: तीन राज्यों की विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनावों की मतगणना ने रविवार को कई अप्रत्याशित नतीजे दिए। बिहार की बांकीपुर सीट से जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने भारतीय जनता पार्टी के अभेद्य किले में सेंध लगाते हुए 31 राउंड की गिनती के बाद 18,953 वोटों की निर्णायक बढ़त बना ली है। वहीं मध्य प्रदेश की दतिया सीट पर कांग्रेस ने बीजेपी को हराकर बड़ा उलटफेर किया, जबकि गुजरात की मांजलपुर सीट पर बीजेपी ने अपनी पकड़ बरकरार रखी।

ताज़ा रुझान (31 राउंड पूरे, 32 में से)
उम्मीदवार दल प्राप्त मत अंतर
प्रशांत किशोर जन सुराज 63,203 +18,953
नीरज कुमार BJP 44,250 —
रेखा कुमारी RJD 14,085 —
क्यों ऐतिहासिक है यह बढ़त?
बांकीपुर (पूर्व में पटना पश्चिम) विधानसभा सीट पर 1995 से लगातार बीजेपी का कब्ज़ा रहा है। यह सीट पटना के सबसे समृद्ध शहरी इलाके में आती है और यहाँ कायस्थ (15-20%) और वैश्य/व्यापारी वर्ग का दबदबा माना जाता है।
2025 के विधानसभा चुनाव का परिदृश्य:
· तत्कालीन BJP विधायक नितिन नबीन को 98,000+ वोट मिले थे
· RJD की रेखा गुप्ता को मात्र 47,000 वोट मिले
· जन सुराज की उम्मीदवार वंदना कुमारी को 8,000 से भी कम वोट मिले और वह अपनी ज़मानत भी नहीं बचा पाईं
एक साल में क्या बदला?
- नितिन नबीन का राज्यसभा जाना: BJP ने उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाकर राज्यसभा भेजा, जिससे यह सीट खाली हुई।
- प्रशांत किशोर का ख़ुद मैदान में उतरना: 2025 में चुनाव लड़ने से इनकार करने वाले प्रशांत ने इस बार व्यक्तिगत रूप से मोर्चा संभाला।
- BJP का उम्मीदवार बदलना: मूल उम्मीदवार अभिषेक कुमार सिन्हा ने नामांकन के 24 घंटे बाद नाम वापस ले लिया। इसके बाद पार्टी को ऐन मौके पर नीरज कुमार को मैदान में उतारना पड़ा।
- जेन ज़ी आंदोलन का असर: 37 दिनों तक चले दिल्ली के छात्र आंदोलन ने शहरी युवाओं में सत्ता-विरोधी लहर पैदा की, जिसका सीधा फ़ायदा प्रशांत किशोर को मिलता दिख रहा है।
प्रशांत किशोर की रणनीति
प्रशांत ने इस चुनाव को सीधे बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के खिलाफ लड़ाई में बदल दिया था। चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने कहा था:
“जनता के पास अब विकल्प आ गया है तो बीजेपी को उम्मीदवार नहीं मिल रहा। मैं बांकीपुर उपचुनाव लड़ने की ज़िम्मेदारी को बिहार में बदलाव की तरफ एक कदम मानता हूँ। अगर हम जीते तो इससे यह आंदोलन मज़बूत होगा और बिहार में बदलाव की सोच को नई ताकत मिलेगी।”
RJD वोटों का ध्रुवीकरण
रेखा कुमारी को मिले 14,085 वोट यह दर्शाते हैं कि मुस्लिम और पारंपरिक RJD वोट बैंक का एक बड़ा हिस्सा रणनीतिक रूप से प्रशांत किशोर की ओर शिफ्ट हो गया। यह बिहार की भविष्य की राजनीति के लिए बड़ा संकेत है।
दतिया (मध्य प्रदेश): कांग्रेस का ऐतिहासिक उलटफेर
अंतिम परिणाम (15/15 राउंड)
उम्मीदवार दल प्राप्त मत अंतर
घनश्याम सिंह कांग्रेस 66,757 +6,016
आशुतोष तिवारी BJP 60,741 —
क्यों अहम है यह जीत?
· 2023 में कांग्रेस के राजेंद्र भारती ने बीजेपी के दिग्गज नरोत्तम मिश्रा को 7,500+ वोटों से हराया था।
· अप्रैल 2026 में भारती को धोखाधड़ी केस में 3 साल की सज़ा हुई, जिससे सीट खाली हुई।
· बीजेपी ने इस बार नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं दिया, जिससे स्थानीय कार्यकर्ताओं में भारी नाराज़गी देखी गई।
· कांग्रेस ने घनश्याम सिंह को उतारकर क्षेत्रीय जातीय समीकरणों का बेहतर इस्तेमाल किया।
· यह जीत ऐसे समय आई है जब कांग्रेस मध्य प्रदेश में संगठन को पुनर्जीवित करने का प्रयास कर रही है। अगले वर्ष होने वाले नगर निकाय और पंचायत चुनावों के लिए यह नैतिक बल प्रदान करेगी।
मांजलपुर (गुजरात): बीजेपी का किला बरकरार
अंतिम परिणाम
उम्मीदवार दल प्राप्त मत अंतर
सतेंद्रभाई पटेल BJP — +30,630
भीखाभाई रबाड़ी कांग्रेस — —
पृष्ठभूमि
· बीजेपी के वरिष्ठ विधायक और पूर्व मंत्री योगेश पटेल (जिन्होंने 36 साल में लगातार 8 विधानसभा चुनाव जीते) का 2 जून को निधन हो गया था।
· इस सीट पर मतदान प्रतिशत 2022 के 63.61% से गिरकर 37.5% पर आ गया—यह शहरी मतदाताओं की उदासीनता को दर्शाता है।
· कांग्रेस ने प्रदेश उपाध्यक्ष भीखाभाई रबाड़ी को उतारकर बीजेपी की पकड़ तोड़ने का प्रयास किया, लेकिन योगेश पटेल की विरासत और पार्टी का संगठनात्मक आधार BJP की जीत सुनिश्चित कर गया।
तीनों नतीजों का राष्ट्रीय संदेश
- शहरी मतदाता में बदलाव: बांकीपुर और दतिया—दोनों शहरी/अर्ध-शहरी सीटों पर BJP को झटका यह संकेत देता है कि जेन ज़ी आंदोलन और महँगाई का असर पारंपरिक भाजपा वोट बैंक पर पड़ रहा है।
- प्रशांत किशोर का उदय: अगर वह यह चुनाव जीत जाते हैं, तो यह एक चुनावी रणनीतिकार से ज़मीनी नेता के रूप में उनके परिवर्तन का प्रमाण होगा। जीरो सीट से सीधे बीजेपी के गढ़ में जीत—यह बिहार की राजनीति को नई दिशा दे सकता है।
- कांग्रेस का मध्य प्रदेश में पुनरुत्थान: लगातार दूसरी बार दतिया में BJP को हराना यह बताता है कि सही उम्मीदवार चयन और स्थानीय नाराज़गी का इस्तेमाल कर कांग्रेस अभी भी प्रासंगिक बनी रह सकती है।
- BJP के लिए चेतावनी: उम्मीदवार बदलने की मजबूरी, कम मतदान और अंदरूनी कलह—ये तीनों संकेत पार्टी नेतृत्व के लिए आत्ममंथन का विषय होने चाहिए।