अली ख़ामेनेई के जनाज़े से ग़ायब रहे बेटे मोजतबा, क्यों इसराइल को माना जा रहा वजह


Ayatollah Khamenei Funeral: ईरान के सुप्रीम लीडर के अंतिम संस्कार में बेटे मोजतबा ख़ामेनेई की ग़ैर-मौजूदगी ने रहस्य गहरा दिया। क्या वाकई मार्च में अमेरिका-इसराइल हमले में घायल हुए थे? ट्रंप की प्रतिक्रिया, ‘डेथ टू अमेरिका’ के नारे और तेहरान में उमड़े जनसैलाब का आँखों देखा हाल।

तेहरान, 06 जुलाई 2026: ईरान के दिवंगत सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई के भव्य अंतिम संस्कार में रविवार को लाखों लोगों का सैलाब उमड़ा, लेकिन एक चेहरा जिसकी हर किसी को तलाश थी, वह नज़र नहीं आया—उनके सबसे प्रभावशाली बेटे और ईरान के मौजूदा सुप्रीम लीडर मोजतबा ख़ामेनेई। उनकी इस रहस्यमयी ग़ैर-मौजूदगी ने उन अटकलों को और हवा दे दी है कि वे मार्च में हुए उसी अमेरिका-इसराइल हवाई हमले में गंभीर रूप से घायल हुए थे, जिसमें उनके पिता की मौत हो गई थी।

पिता के जनाज़े में तीन बेटे मौजूद, मोजतबा ग़ायब

रविवार को तेहरान के ग्रैंड मोसल्ला धार्मिक परिसर में आयोजित अंतिम संस्कार की रस्म में अली ख़ामेनेई के बाकी तीन बेटे—मसूद, मुस्तफ़ा और मैसम—सभी मौजूद रहे। उनके साथ राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान, रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के प्रमुख अहमद वाहिदी और शासन के कई वरिष्ठ अधिकारी भी थे। 97 वर्षीय प्रसिद्ध शिया धर्मगुरु आयतुल्लाह जाफ़र सोभानी ने अंतिम प्रार्थना कराई। लेकिन मोजतबा ख़ामेनेई की अनुपस्थिति ने सबका ध्यान खींचा।

क्या मोजतबा हमले में घायल हुए थे?

मार्च की शुरुआत में ईरान का सर्वोच्च नेता बनने के बाद से मोजतबा ख़ामेनेई एक बार भी सार्वजनिक रूप से नहीं दिखे हैं। ईरान के अंदर और बाहर लगातार ऐसी रिपोर्टें आती रही हैं कि फरवरी में तेहरान पर हुए अमेरिकी-इसराइली हवाई हमले में वे स्वयं भी बुरी तरह घायल हुए थे। उनकी लगातार अनुपस्थिति और अब अपने पिता के जनाज़े से भी दूर रहना इन दावों को बल देता है।

इसराइल से ख़तरा या कोई और वजह?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मोजतबा ख़ामेनेई के सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूर रहने के पीछे इसराइल से सीधा सुरक्षा ख़तरा भी एक बड़ी वजह हो सकती है। ईरान और इसराइल के बीच लंबे समय से चली आ रही छद्म जंग अब खुले टकराव में बदल चुकी है, और एक ताज़ा सुप्रीम लीडर के तौर पर मोजतबा इसराइल की हिट लिस्ट में सबसे ऊपर हो सकते हैं।

ट्रंप का चौंकाने वाला बयान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को न्यूज़ वेबसाइट एक्सियोस को दिए इंटरव्यू में कहा कि अंतिम संस्कार के कारण शांति वार्ता एक सप्ताह के लिए रोक दी गई है। उन्होंने एक विवादित टिप्पणी करते हुए यह भी कहा:

“ईरानी शासन के तमाम वरिष्ठ अधिकारी एक ही जगह मौजूद हैं। अमेरिका चाहे तो ‘एक ही हमले’ में उन सभी को मार सकता है। लेकिन हम ऐसा नहीं करेंगे, क्योंकि फिर बातचीत करने के लिए कोई नहीं बचेगा।”

ट्रंप ने यह कहकर एक नया विवाद खड़ा कर दिया कि उन्हें ईरानियों को रोता देखकर हैरानी हुई, क्योंकि उन्हें लगता था कि लोग ख़ामेनेई से नफरत करते हैं। उन्होंने कहा, “हो सकता है ये नकली आँसू हों।”

ईरानियों का जवाब

ट्रंप के ‘नकली आँसू’ वाले बयान पर 50 वर्षीय महिला ज़हरा सफ़ाई ने रॉयटर्स से कहा, “हमने 47 साल पहले नकली आँसू बहाने के लिए क्रांति नहीं की थी। हमने अपने इतने शहीदों की क़ुर्बानी नकली आँसू बहाने के लिए नहीं दी।”

‘किल ट्रंप’, ‘किल बीबी’ के नारे और बदले का संकल्प

रविवार को ग्रैंड मोसल्ला और तेहरान की सड़कों पर माहौल ग़म और ग़ुस्से का अजीब संगम था। भीड़ ने “डेथ टू अमेरिका” और “डेथ टू इसराइल” के नारे लगाए। कई बैनरों पर “किल ट्रंप” और “किल बीबी” (इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू) लिखा था।

कवि मोहम्मद रसूली ने नमाज़ से पहले कविता पाठ में कहा, “अब ट्रंप की हत्या करना हम सबकी ज़िम्मेदारी है।” लोगों ने “वी विल एवेंज” (हम बदला लेंगे) के बैनर भी पकड़ रखे थे।

‘सदी का अंतिम संस्कार’: 2 करोड़ लोगों के आने का अनुमान

ईरानी अधिकारी इस आयोजन को “सदी का अंतिम संस्कार” करार दे रहे हैं। अनुमान है कि पूरे सप्ताह चलने वाली इन रस्मों में 1.2 करोड़ से 2 करोड़ लोग शामिल होंगे। केवल तेहरान में ही रविवार को एक करोड़ से अधिक लोगों की भीड़ उमड़ी।

भीषण गर्मी और भगदड़ का ख़तरा

· 4,000 से अधिक लोगों ने ग्रैंड मोसल्ला और आसपास के चिकित्सा केंद्रों में इलाज कराया।
· भीषण गर्मी से राहत देने के लिए लोगों पर पानी की फुहारें छिड़की गईं।
· एक बुज़ुर्ग महिला को स्ट्रेचर पर ले जाते हुए देखा गया।
· भगदड़ की आशंका के चलते कड़े सुरक्षा इंतज़ाम किए गए हैं।

पार्थिव शरीर के साथ एक साल की पोती का ताबूत

अली ख़ामेनेई के पार्थिव शरीर के साथ उनके चार रिश्तेदारों के ताबूत भी रखे गए, जो तेहरान पर हुए उसी हमले में मारे गए थे। इनमें उनकी एक वर्षीय पोती ज़हरा मोहम्मदी गोलपायगानी भी शामिल है। यह दृश्य वहाँ मौजूद लोगों के लिए बेहद भावुक कर देने वाला था।

अंतिम यात्रा का कार्यक्रम

· रविवार: ग्रैंड मोसल्ला में अंतिम प्रार्थना।
· सोमवार (आज): तेहरान में अंतिम यात्रा निकाली जाएगी।
· मंगलवार: पार्थिव शरीर को पवित्र शहर क़ोम ले जाया जाएगा।
· बुधवार: पड़ोसी इराक़ के एक प्रमुख शिया स्थल पर अंतिम दर्शन।
· गुरुवार: उत्तर-पूर्वी जन्मस्थान मशहद में दफ़नाया जाएगा।

ख़ामेनेई की विरासत और नाज़ुक युद्धविराम

अली ख़ामेनेई ने 1989 से फरवरी 2026 में अपनी मृत्यु तक ईरान का नेतृत्व किया। अपने शासनकाल में उन्होंने पश्चिम के साथ टकराव की नीति अपनाई और ग़ज़ा में हमास, लेबनान में हिज़्बुल्लाह और यमन में हूती विद्रोहियों जैसे समूहों को समर्थन दिया।

फ़िलहाल अमेरिका और ईरान के बीच नाज़ुक युद्धविराम लागू है और स्थायी शांति समझौते के लिए बातचीत जारी है। लेकिन दोनों पक्षों ने चेतावनी दी है कि ज़रूरत पड़ने पर वे दोबारा सैन्य कार्रवाई शुरू करने को तैयार हैं। इस अनिश्चितता के बीच, मोजतबा ख़ामेनेई की अनुपस्थिति ने इस रहस्य को और गहरा दिया है कि ईरान का भविष्य किस दिशा में जाएगा।

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