Champat Rai Statement on Ram Mandir Donation Theft: इस्तीफे के बाद पहली बार बयान जारी कर चंपत राय ने कहा- ‘संकट में ही धैर्य और धर्म की परीक्षा होती है। SIT की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद सभी सवालों के जवाब दूंगा।’ ट्रस्ट की बैठक, नए अंतरिम महामंत्री कृष्ण मोहन और पूरे विवाद की इनसाइड स्टोरी।
अयोध्या/नई दिल्ली, 07 जुलाई 2026: श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महामंत्री पद से इस्तीफा देने और मंदिर के चढ़ावे में हुई कथित चोरी को लेकर एक महीने से अधिक समय तक मौन रहने के बाद विश्व हिंदू परिषद (VHP) के वरिष्ठ नेता चंपत राय ने आखिरकार अपनी चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक भावुक पत्र साझा करते हुए कहा कि एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद वे हर सवाल का क्रमवार उत्तर देंगे।
रामचरितमानस की चौपाई के साथ दिया संदेश
चंपत राय ने अपने पोस्ट में गोस्वामी तुलसीदास रचित रामचरितमानस के अयोध्या कांड की एक प्रसिद्ध चौपाई लिखी:
“धीरज धर्म मित्र अरु नारी, आपद काल परिखिअहिं चारी।”
अर्थात—धैर्य, धर्म, मित्र और जीवनसाथी—इन चारों की सच्ची पहचान केवल विपत्ति के समय में ही होती है। इस चौपाई के माध्यम से उन्होंने स्पष्ट संकेत दिया कि वर्तमान विवाद को वे एक “परीक्षा की घड़ी” के रूप में देख रहे हैं।
चंपत राय के पत्र की 5 अहम बातें
अपने एक्स हैंडल पर “चंपत राय की पाती रामभक्तों के नाम” शीर्षक से जारी इस पत्र में उन्होंने लिखा:

- मौन का कारण: “पिछले 7 जून 2026 से, श्री रामजन्मभूमि मन्दिर परिसर के दानपात्र की गणना के समय की गई चोरी के संबंध में अनेक प्रकार की चर्चाएं चल रही हैं। व्यक्तिगत रूप से मेरे ऊपर अनेकों ने अनर्गल आरोप लगाए हैं। मैंने मौन धारण कर लिया है।”
- SIT रिपोर्ट का इंतजार: “6 जुलाई को सम्पन्न ट्रस्ट की बैठक में एसआईटी की प्राथमिक रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। हालांकि यह ‘परम गोपनीय’ थी, अब सार्वजनिक हो चुकी है। आप सभी को आश्वस्त करता हूं कि अन्तिम रिपोर्ट आने के बाद, फैलाये जा रहे सभी बिन्दुओं पर अपना उत्तर क्रमानुसार दूंगा।”
- जीवन की पारदर्शिता: “मेरा प्रचारक जीवन 45 वर्ष से, जहाँ-जहाँ मैं रहा, खुली पुस्तक के समान है।”
- कार्यकर्ता जीवन का उल्लेख: उन्होंने स्मरण कराया कि वे अक्टूबर 1991 से संगठन द्वारा अयोध्या भेजे गए थे और तब से लगातार आंदोलन और सेवा में लगे हैं।
- भविष्य का भरोसा: “सभी सत्य सामने आ जाएगा।”
ट्रस्ट की बैठक में क्या हुआ?
सोमवार, 6 जुलाई को हुई श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की अहम बैठक में तीन बड़े फैसले लिए गए:
· चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया।
· कृष्ण मोहन को अंतरिम महामंत्री नियुक्त किया गया।
· नए अधिकारियों की नियुक्ति के लिए एक समिति का गठन किया गया।
· 22 जुलाई को ट्रस्ट की अगली बैठक निर्धारित की गई, जिसमें एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट आने की उम्मीद है।
ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने स्पष्ट किया कि ट्रस्ट के संविधान के अनुसार, इस्तीफा देते ही उसे स्वीकृत मान लिया जाता है।
कौन हैं नए अंतरिम महामंत्री कृष्ण मोहन?
चंपत राय की जगह लेने वाले कृष्ण मोहन का परिचय किसी साधारण प्रशासक से कहीं अधिक है:
· आयु: 73 वर्ष
· शिक्षा: लखनऊ विश्वविद्यालय से भूविज्ञान (जियोलॉजी) में एमएससी
· पूर्व करियर: परमाणु ऊर्जा विभाग में वैज्ञानिक, बाद में 1978 में भारतीय वन सेवा (IFS) में शामिल। 2012 में महाराष्ट्र कैडर से अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक के पद से सेवानिवृत्त।
· RSS पृष्ठभूमि: नगर संघचालक, जिला संघचालक, अवध प्रांत के प्रांत संघचालक और पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्र संघचालक रह चुके हैं।
· राम मंदिर से जुड़ाव: जनवरी 2024 में पहली प्राण प्रतिष्ठा में पत्नी के साथ यजमान दंपति के रूप में शामिल हुए थे। सितंबर 2025 में दिवंगत सदस्य कामेश्वर चौपाल के स्थान पर ट्रस्ट में नियुक्त किए गए।
· सामाजिक पहचान: वे भी कामेश्वर चौपाल की तरह दलित समुदाय से आते हैं। उत्तर प्रदेश के हरदोई ज़िले के मूल निवासी हैं।
उन्होंने नियुक्ति पर कहा था, “यह मेरे लिए अप्रत्याशित था। यह सब भगवान राम की इच्छा से हुआ है। मैं अपनी नई ज़िम्मेदारी पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ निभाऊंगा।”
क्या है चढ़ावा चोरी का पूरा मामला?
· 7 जून 2026: राम मंदिर परिसर में दानपात्रों की गणना के दौरान बड़ी मात्रा में चढ़ावे की चोरी का खुलासा हुआ।
· इसके बाद ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा पर गंभीर आरोप लगे।
· 26-27 जून: चंपत राय ने अपने पद से इस्तीफा दिया, जिसकी पुष्टि ट्रस्ट ने 27 जून को एक पत्र के माध्यम से की।
· राज्य सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) मामले की जाँच कर रही है। प्राथमिक रिपोर्ट 6 जुलाई को ट्रस्ट को सौंपी गई, जबकि अंतिम रिपोर्ट का इंतजार है।
आगे क्या?
चंपत राय के इस बयान को उनके राजनीतिक और सांगठनिक भविष्य की दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है। राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख चेहरों में से एक रहे चंपत राय का यह कहना कि “सभी सत्य सामने आ जाएगा,” यह संकेत देता है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।

फिलहाल, पूरे देश की निगाहें 22 जुलाई की ट्रस्ट बैठक और एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हैं। यह रिपोर्ट न केवल चंपत राय के भविष्य का फैसला करेगी, बल्कि राम मंदिर ट्रस्ट की पारदर्शिता और विश्वसनीयता की भी असली परीक्षा होगी।