Ethanol Blending Mileage Truth: पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने E20 ईंधन के माइलेज, कीमत और प्रदर्शन पर बड़ा खुलासा किया। जानिए इथेनॉल मिश्रण के 5 बड़े फायदे, विदेशी मुद्रा बचत और आगे की योजना।

नई दिल्ली, 03 जुलाई 2026: पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण (Ethanol Blending) को लेकर आम वाहन मालिकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही रहता है—क्या इससे गाड़ी का माइलेज कम हो जाएगा? इसी बहस के बीच केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने एक बड़ा बयान देते हुए न केवल इस आशंका को स्वीकार किया, बल्कि यह भी स्पष्ट किया कि सरकार की जैव ईंधन नीति देशहित में क्यों आवश्यक है।
क्या सचमुच घटेगा माइलेज? मंत्री ने मानी यह बात
हरदीप सिंह पुरी ने स्वीकार किया कि “इथेनॉल मिश्रण से कुछ मामलों में वाहनों के माइलेज में हल्की कमी आ सकती है, लेकिन इसके पीछे कई अन्य कारण भी हो सकते हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि इलेक्ट्रिक वाहनों और जैव ईंधन वाले वाहनों, दोनों के लिए बाजार में पर्याप्त जगह मौजूद है। भविष्य में दोनों तकनीकें साथ-साथ चलेंगी।
रेसिंग कारों में सफल हो रहा इथेनॉल: प्रदर्शन पर क्या असर?
मंत्री ने इथेनॉल के प्रदर्शन को लेकर एक दिलचस्प तथ्य साझा किया। उन्होंने कहा, “रेसिंग कारों में इथेनॉल का सफलतापूर्वक इस्तेमाल हो रहा है और यह वाहनों की रफ्तार व प्रदर्शन बेहतर बनाने में मदद करता है।”
पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, एथेनॉल की ऑक्टेन रेटिंग लगभग 108 RON होती है, जो इसे हाई-परफॉर्मेंस इंजनों के लिए आदर्श बनाती है। इसके तीन प्रमुख लाभ हैं:
· इंजन में नॉकिंग (असामान्य ध्वनि) कम होती है
· इंजन की शक्ति में वृद्धि होती है
· बेहतर कूलिंग मिलती है, जिससे इंजन की आयु बढ़ती है
E20 से आगे क्या है सरकार की योजना?
मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत E20 से आगे तभी बढ़ेगा, जब पर्याप्त परीक्षण और तकनीकी जाँच पूरी हो जाएगी। सरकार बिना पूरी तैयारी के कोई भी कदम नहीं उठाएगी।
भारत दिसंबर 2025 तक E20 (20%) लक्ष्य हासिल
इथेनॉल उत्पादन का चौंकाने वाला विकास
भारत का इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम 2000 के दशक से संचालित है। इस दौरान जो प्रगति हुई है, वह अभूतपूर्व है:
· 2013-14: उत्पादन क्षमता मात्र 38 करोड़ लीटर/वर्ष
· 2025-26: उत्पादन क्षमता बढ़कर 2,000 करोड़ लीटर/वर्ष
· मिश्रण दर: 1.5% से छलांग लगाकर 20% (दिसंबर 2025) तक पहुँची
EBP कार्यक्रम के 5 बड़े फायदे (2014-15 से अब तक)
पेट्रोलियम मंत्रालय द्वारा जारी आँकड़ों के अनुसार:
- विदेशी मुद्रा बचत: 1.90 लाख करोड़ रुपये से अधिक
- किसानों को सीधा लाभ: 1.60 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान
- कच्चे तेल का आयात घटा: लगभग 310 लाख मीट्रिक टन की कमी
- कार्बन उत्सर्जन में गिरावट: लगभग 930 लाख मीट्रिक टन CO₂ कम उत्सर्जित
- ऊर्जा सुरक्षा: आयात निर्भरता में लगातार गिरावट
तेल कंपनियों पर बढ़ता वित्तीय दबाव
हरदीप सिंह पुरी ने सरकारी तेल कंपनियों की वित्तीय स्थिति पर भी चिंता जताई। मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव आया है। इसका सीधा असर:
· 30 जून 2026 तक: पेट्रोल, डीजल और LPG को लागत से कम पर बेचने से 74,781 करोड़ रुपये का नुकसान
· अप्रैल-जून 2026 तिमाही: कुल अंडर-रिकवरी 1.88 लाख करोड़ रुपये तक पहुँची
क्या घटेंगी पेट्रोल-डीजल की कीमतें?
ईंधन की खुदरा कीमतों में कटौती की संभावना पर मंत्री ने सतर्क रुख अपनाया। उन्होंने कहा, “अभी इस बारे में कुछ कहना जल्दबाजी होगी। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें अगले दो से तीन महीने तक कम बनी रहती हैं, तब सरकार आगे की स्थिति पर विचार करेगी।”

निष्कर्ष: क्या इथेनॉल मिश्रण सही दिशा है?
हरदीप सिंह पुरी ने जोर देकर कहा कि सरकार की जैव ईंधन नीति ऊर्जा सुरक्षा, किसानों की आय और पर्यावरण संरक्षण—इन तीन स्तंभों पर खड़ी है। माइलेज में मामूली कमी की संभावना के बावजूद, इस कार्यक्रम के दीर्घकालिक आर्थिक और पर्यावरणीय लाभ इसे देश के लिए एक रणनीतिक आवश्यकता बनाते हैं।