Trump Turkey Israel Tension: नेटो समिट में ट्रंप और अर्दोआन की नज़दीकी और F-35 लड़ाकू विमानों की संभावित बिक्री ने इज़राइल की चिंता बढ़ा दी। नेतन्याहू बोले- ‘ऐसे शासन को विमान नहीं मिलने चाहिए’। जानिए क्यों इज़राइली मीडिया इसे ‘डर का शिखर सम्मेलन’ कह रहा है।
तेल अवीव/अंकारा, 09 जुलाई 2026: अंकारा में संपन्न नेटो शिखर सम्मेलन के बाद इज़राइली मीडिया और सुरक्षा प्रतिष्ठान में एक आशंका गहरा गई है—क्या अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का तुर्की की ओर बढ़ता झुकाव मध्य पूर्व में इज़राइल की सैन्य श्रेष्ठता को कमज़ोर कर देगा? इज़राइली अख़बारों के पहले पन्ने इस चिंता की गवाही दे रहे हैं। मध्यमार्गी अख़बार मारिव ने जहाँ इसे “डर का शिखर सम्मेलन” करार दिया, वहीं उदारवादी हारेत्ज़ ने लिखा—“ट्रंप ने अर्दोआन का साथ दिया”। लोकप्रिय येदिओत अहरोनोत ने दोनों नेताओं की तस्वीर के साथ एक शब्द में सुर्खी लगाई—”कनेक्टेड”।

F-35 डील: इसराइल की सबसे बड़ी चिंता
इज़राइल की बेचैनी की सबसे बड़ी वजह है अमेरिका की तुर्की को F-35 लड़ाकू विमान बेचने की संभावित मंज़ूरी। तुर्की को 2019 में रूस से S-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली खरीदने के कारण F-35 कार्यक्रम से बाहर कर दिया गया था, लेकिन अब ट्रंप प्रशासन इस प्रतिबंध को हटाने पर विचार कर रहा है।
प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी:
“अर्दोआन इसराइल के विनाश और यरूशलम पर क़ब्ज़ा करने की बात करते हैं। वह हमास की मेज़बानी करते हैं। ऐसे शासन को विमान नहीं मिलने चाहिए।”
इसराइली मीडिया में क्यों मचा है हड़कंप?
‘अमेरिका में घटता इसराइल का प्रभाव’
नदाव एयाल (येदिओत अहरोनोत) ने नेटो समिट को “पाखंड का तमाशा” बताते हुए कहा कि अमेरिका में इज़राइल का प्रभाव कम हुआ है और व्हाइट हाउस के भीतर तुर्की के प्रति समर्थन लगातार बढ़ रहा है।
‘नया क्षेत्रीय समीकरण‘
अन्ना बार्स्की (मारिव) के अनुसार, ट्रंप का यह कहना कि “हम अपने दोस्तों पर प्रतिबंध नहीं लगाना चाहते” और “इसराइल हमारा क़रीबी सहयोगी है, लेकिन वही एकमात्र प्राथमिकता नहीं है”—ये दोनों बयान क्षेत्र के प्रति अमेरिका के बदलते दृष्टिकोण को रेखांकित करते हैं।
बार्स्की का निष्कर्ष है कि अमेरिका अब तुर्की को “नए क्षेत्रीय समीकरण” का एक अहम साझेदार मानने लगा है और वह इज़राइल के साथ अपने पुराने गठबंधन और व्यापक भू-राजनीतिक हितों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है।
‘अर्दोआन से बढ़ता ख़तरा‘
दक्षिणपंथी अख़बार यिस्राएल हायोम के एरियल काहाना ने चेतावनी दी कि अर्दोआन से “इज़राइल को ख़तरा बढ़ता जा रहा है।” उन्होंने तुर्की की सैन्य महत्वाकांक्षाओं और क्षेत्रीय सक्रियता को इज़राइल की सुरक्षा के लिए सीधी चुनौती बताया।
तुर्की की बढ़ती सैन्य महत्वाकांक्षाएँ
इज़राइली सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, तुर्की सिर्फ F-35 तक ही सीमित नहीं है। वह इससे भी आगे की योजना बना रहा है:
- सीरिया में एयर डिफेंस सिस्टम: तुर्की सीरिया में वायु रक्षा प्रणाली तैनात करने पर विचार कर रहा है, जिसका सीधा उद्देश्य इज़राइली वायुसेना की गतिविधियों को सीमित करना है।
- भूमध्य सागर में नौसैनिक चुनौती: तुर्की भूमध्य सागर में इज़राइली नौसेना की सक्रियता पर अंकुश लगाने की स्थिति में है।
- हमास को समर्थन: तुर्की लगातार हमास के नेताओं की मेज़बानी कर रहा है, जिसे इज़राइल अपने अस्तित्व के लिए सीधा ख़तरा मानता है।
ट्रंप ने अर्दोआन की जमकर तारीफ़ की
नेटो समिट के दौरान ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से कहा कि अर्दोआन ने तुर्की को “सैन्य रूप से बेहद मज़बूत देश” बना दिया है। यह बयान ऐसे समय आया है जब तुर्की और इज़राइल के संबंध ऐतिहासिक रूप से सबसे निचले स्तर पर हैं।
नेतन्याहू का जवाबी रुख
प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने स्पष्ट किया कि इज़राइल का वर्तमान लक्ष्य “समुद्री मार्गों और समुद्री व्यापार की आज़ादी की सुरक्षा सुनिश्चित करना” है। यह बयान तुर्की की भूमध्य सागर में बढ़ती मौजूदगी के संदर्भ में बेहद अहम माना जा रहा है।
निष्कर्ष: मध्य पूर्व में बन रहा नया शक्ति संतुलन?
दक्षिणपंथी चैनल 14 के एक विश्लेषक ने चेतावनी दी कि “ट्रंप की तुर्की को F-35 बेचने की इच्छा ने अर्दोआन को इज़राइल पर बढ़त दे दी है, जो उसके लिए ख़तरनाक साबित हो सकती है।”

यह पूरा घटनाक्रम इस ओर इशारा करता है कि मध्य पूर्व में शक्ति का पारंपरिक संतुलन तेज़ी से बदल रहा है। अमेरिका अब केवल इज़राइल-केंद्रित नीति के बजाय एक व्यापक क्षेत्रीय रणनीति अपना रहा है, जिसमें तुर्की एक प्रमुख स्तंभ के रूप में उभर रहा है। इज़राइल के लिए यह स्थिति न केवल सैन्य, बल्कि कूटनीतिक रूप से भी एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है।

