Pneumonic Plague Risk: साइबेरिया में प्लेग-रोधी संस्थान की कर्मचारी की मौत के बाद अफवाहों का बाज़ार गर्म। लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक वैश्विक महामारी की आशंका बेहद कम है—जानिए एंटीबायोटिक्स, लक्षणों की तेजी और लैब सुरक्षा का पूरा विज्ञान।
नई दिल्ली/इरकुत्स्क, 08 अक्टूबर 2026: साइबेरिया के इरकुत्स्क क्षेत्र में स्थित प्लेग-रोधी संस्थान में कार्यरत 28 वर्षीय दरिया शिपिलोवा की निमोनिया से मौत के बाद सोशल मीडिया पर अफवाहों और अटकलों का बाज़ार गर्म है। रूसी मीडिया के अनुसार लगभग 200 लोगों को आइसोलेशन में रखा गया है, हालाँकि अधिकारियों ने प्लेग से

जुड़ी चिंताओं को खारिज किया है। मौत का आधिकारिक कारण अभी स्पष्ट नहीं हुआ है और लैब जाँच जारी है—लेकिन एक बात विशेषज्ञों के लिए साफ है: इस मामले से वैश्विक महामारी फैलने की आशंका नहीं है। जानिए ऐसा क्यों।
पहले समझें: प्लेग के तीन रूप क्या हैं?
प्लेग येरसिनिया पेस्टिस नामक जीवाणु से होता है। मेडिकल रूप से इसके तीन प्रकार हैं:
प्रकार कैसे फैलता है विशेषता
ब्यूबोनिक प्लेग संक्रमित पिस्सू के काटने से सबसे आम; लसीका ग्रंथियों में ‘ब्यूबोज़’ नामक दर्दनाक घाव
सेप्टिसेमिक प्लेग जीवाणु रक्त में फैलने से रक्त संक्रमण, अत्यंत घातक
न्यूमोनिक प्लेग खाँसने-छींकने से हवा में फैलने वाली बूँदों से एक व्यक्ति से दूसरे में फैल सकता है, इलाज न हो तो जानलेवा
अहम बात: ब्यूबोनिक प्लेग का एक व्यक्ति से दूसरे में फैलना दुर्लभ है। लेकिन जीवाणु फेफड़ों तक पहुँच जाए तो यह न्यूमोनिक प्लेग में बदल सकता है, जो 24 घंटे के भीतर लक्षण शुरू कर सकता है।
अगर इतना खतरनाक है, तो महामारी की आशंका कम क्यों?—5 बड़े कारण
- प्रभावी एंटीबायोटिक्स मौजूद हैं
ऑक्सफ़र्ड विश्वविद्यालय में संक्रामक रोगों के प्रोफेसर पिएरो ओलियारो कहते हैं:
“हमारे पास ब्यूबोनिक प्लेग के लिए दो उपचार हैं जो बहुत अच्छी तरह काम करते हैं।”
2025 में ओलियारो और उनके सहयोगियों ने मेडागास्कर में ब्यूबोनिक प्लेग के उपचार पर पहला परीक्षण प्रकाशित किया:
एंटीबायोटिक प्रभावशीलता
ओरल सिप्रोफ्लोक्सासिन 91%
इंजेक्शन एमिनोग्लाइकोसाइड 92%
जिन मामलों में प्लेग निमोनिया में बदल गया, उनमें भी तुरंत इलाज से 85% मरीज़ ठीक हो गए।
- लक्षण तेज़ी से और स्पष्ट रूप से दिखते हैं
कोविड-19 के विपरीत, न्यूमोनिक प्लेग लक्षण शुरू होने के बाद ही फैलता है—आमतौर पर 24 घंटे के भीतर। लक्षण गंभीर और स्पष्ट होते हैं, जिससे:
· संक्रमण फैलने से पहले ही नए मामलों की पहचान
· तुरंत अलगाव (आइसोलेशन)
· और उपचार संभव हो जाता है
बर्मिंघम विश्वविद्यालय में वायरल इम्यूनोलॉजी की एसोसिएट प्रोफेसर ज़ानिया स्टामाटाकी कहती हैं:
“यह ऐसी चीज़ नहीं है जिसे हम नज़रअंदाज़ कर सकते हैं। लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं कि यह महामारी बनेगी।”
- WHO ने जोखिम आकलन जारी कर दिया है
विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रवक्ता क्रिश्चियन लिंडमेयर ने मंगलवार को ‘प्रारंभिक जोखिम आकलन’ की घोषणा करते हुए कहा:
“इरकुत्स्क के लिए जोखिम मध्यम से कम है, पूरे रूसी संघ के लिए कम है, और WHO के यूरोपीय क्षेत्र के लिए बहुत कम है।”
WHO के अनुसार, सभी संपर्कों की पहचान कर ली गई है और उन पर निगरानी रखी जा रही है। अमेरिकी CDC की सलाह के मुताबिक, जोखिम वाले लोगों को निगरानी और जाँच के बाद एंटीबायोटिक्स दी जा सकती हैं।
- लैब में संक्रमण फैलना बेहद दुर्लभ है
स्टामाटाकी बताती हैं कि प्लेग जैसे खतरनाक जीवाणुओं पर काम करने वाली प्रयोगशालाओं में सुरक्षा की कई परतें होती हैं:
· शोधकर्ता पूरी व्यक्तिगत सुरक्षा (PPE) पहनते हैं
· नमूनों को केवल जैव सुरक्षा कैबिनेट के अंदर संभाला जाता है
· ये कैबिनेट नकारात्मक वायु दाब के अधीन होते हैं—हवा का प्रवाह अंदर की ओर और उपयोगकर्ता से दूर होता है
“अगर कोई ट्यूब टूट जाती है, तो वह कैबिनेट के अंदर ही टूटेगी और उपयोगकर्ता सुरक्षित रहेगा।”
नमूनों को ट्रांसपोर्ट करते समय भी सेकेंडरी कंटेनमेंट वेसल में रखा जाता है, और तकनीशियनों को गहन प्रशिक्षण दिया जाता है।
- आधुनिक परिस्थितियाँ प्लेग के अनुकूल नहीं
14वीं शताब्दी में ‘ब्लैक डेथ’ ने यूरोप की 2.5 करोड़ से अधिक आबादी को खत्म कर दिया—एक तिहाई से दो-तिहाई लोग मारे गए। उस समय प्लेग इतनी तेज़ी से क्यों फैला?
· सड़कों पर कूड़ा-करकट और खाने के टुकड़े बिखरे रहते थे—जो काले चूहों और पिस्सुओं के लिए आदर्श घोंसला थे
· लोग बेहद नज़दीक रहते थे
· व्यापारी महीनों तक तंग जहाजों में यात्रा करते थे
दुनिया के अधिकांश हिस्सों में अब ऐसे हालात नहीं हैं।
प्लेग अभी भी मौजूद है—लेकिन महामारी नहीं बनता
यह समझना ज़रूरी है कि प्लेग सिर्फ ऐतिहासिक बीमारी नहीं है। यह अफ्रीका, एशिया, दक्षिण अमेरिका और अमेरिका तक में चूहों की आबादी में मौजूद है।
देश/क्षेत्र स्थिति
अमेरिका औसतन हर साल 7 मामले
मेडागास्कर (2017) 2,417 मामले, 209 मौतें—लेकिन प्रकोप स्थानीय रहा
ओलियारो बताते हैं कि मेडागास्कर का प्रकोप समाप्त होना इस बात का प्रमाण है कि प्लेग के प्रकोप आमतौर पर सीमित क्षेत्र में ही फैलते हैं और महामारी का रूप नहीं लेते।
“वैश्विक स्तर पर इसका प्रभाव शायद बहुत से लोगों पर न पड़े, लेकिन फिर भी इससे पीड़ा होती है। यह एक महत्वपूर्ण बीमारी है, इसलिए हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि प्लेग जैसी बीमारी मौजूद है।”
निष्कर्ष
साइबेरिया की यह घटना निश्चित रूप से चिंता का विषय है और इसकी जाँच जारी रहनी चाहिए। लेकिन वैज्ञानिक तथ्य स्पष्ट हैं:

- प्रभावी एंटीबायोटिक्स उपलब्ध हैं
- लक्षण तेज़ी से और स्पष्ट दिखते हैं, जिससे तुरंत पहचान संभव है
- WHO ने जोखिम कम बताया है और निगरानी सक्रिय है
- लैब सुरक्षा प्रोटोकॉल मज़बूत हैं
- आधुनिक जीवनशैली और स्वच्छता प्लेग के प्रसार के अनुकूल नहीं
इसलिए, जहाँ सतर्कता और जाँच ज़रूरी है, वहीं वैश्विक महामारी की आशंका फिलहाल बेहद कम है।

