Jantar Mantar Protest 2026: मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में CJP का प्रदर्शन। पुलिस ने सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिया, अभिजीत दीपके एयरपोर्ट से गिरफ्तार। ज्यां द्रेज को धरने पर बैठने नहीं दिया गया। पढ़ें BBC की ज़मीनी रिपोर्ट।
नई दिल्ली, 11 अक्टूबर 2026: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर शनिवार को दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आह्वान पर हुए प्रदर्शन के दौरान दिनभर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच खींचतान चलती रही। सुबह से ही जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में भारी बैरिकेडिंग थी और हज़ारों की संख्या में सुरक्षाबल तैनात थे। बीबीसी के पाँच संवाददाताओं ने दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में जाकर जो देखा, उसके आधार पर पेश है पूरे दिन का हाल।
सुबह: हिरासत में लिए गए CJP नेता, एयरपोर्ट से ही गिरफ्तारी

बीबीसी संवाददाता दिलनवाज़ पाशा सुबह साढ़े दस बजे एयरपोर्ट पर मौजूद थे, जब CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को मुंबई से दिल्ली पहुँचते ही हिरासत में ले लिया गया। वहाँ मौजूद कई कार्यकर्ता यह ख़बर सुनकर उदास दिखाई दिए।
इसके बाद दोपहर करीब डेढ़ बजे नेहा बोरा सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ आईएनए मार्केट से सफ़दरजंग की ओर बढ़ीं। करीब एक घंटे तक प्रदर्शन करने के बाद उन्हें भी हिरासत में ले लिया गया। बीबीसी से बातचीत में नेहा ने कहा कि वह दोबारा सड़कों पर दिखाई देंगी।
दोपहर: ज्यां द्रेज को धरने पर बैठने नहीं दिया गया
बीबीसी संवाददाता राघवेंद्र राव ने बताया कि दोपहर में मशहूर अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज जंतर-मंतर के दूसरे एंट्री पॉइंट के पास पहुँचे। उनके हाथ में एक पोस्टर था, जिस पर चुनाव आयोग, ज्ञानेश कुमार और SIR प्रक्रिया के ख़िलाफ़ नारे लिखे थे। वह पोस्टर लहराना और धरने पर बैठना चाहते थे, लेकिन सात-आठ पुलिसकर्मियों ने उन्हें उठाकर बस में बैठा दिया। उनके साथ मौजूद कुछ महिला कार्यकर्ताओं को भी वहाँ से हटा दिया गया।
कनॉट प्लेस: छोटे समूहों में पहुँचे प्रदर्शनकारी, इमरजेंसी एग्ज़िट से भागे
राघवेंद्र राव के मुताबिक़, सुबह के शुरुआती तीन-चार घंटे शांतिपूर्वक बीते, क्योंकि जंतर-मंतर की ओर जाने वाली सड़कों पर भारी बैरिकेडिंग थी। लेकिन दोपहर बाद प्रदर्शनकारियों का एक बड़ा समूह पास की सड़क पर कुछ देर के लिए धरने पर बैठ गया। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की और उन्हें बसों में भरकर वहाँ से ले जाने की कोशिश की।
इसी दौरान एक बड़ी घटना हुई—जिस बस में कई प्रदर्शनकारियों को ले जाया जा रहा था, उसका पिछला इमरजेंसी एग्ज़िट खोलकर कई प्रदर्शनकारी बस से उतर गए और भागने में कामयाब रहे।
रेलवे स्टेशन: ट्रेनें रद्द, यात्री असमंजस में
बीबीसी संवाददाता सिद्धनाथ गनु सुबह दस बजे नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पहुँचे। उस समय तक स्टेशन के सूचना बोर्ड पर दस से बारह ट्रेनों के रद्द होने की जानकारी आ चुकी थी। सुबह तक आई मीडिया रिपोर्टों में बताया गया था कि नई दिल्ली और निज़ामुद्दीन स्टेशनों से जुड़ी दो सौ से ज़्यादा ट्रेनें रद्द हो चुकी थीं।
· बिहार से आए एक युवक को करोल बाग जाना था, लेकिन ऑटो चालकों ने बैरिकेडिंग का हवाला देकर मना कर दिया। कैब चालक कम दूरी के लिए भी मोटा किराया मांग रहे थे।
· मोबाइल इंटरनेट बंद होने के कारण ऐप से कैब बुक करना और UPI से भुगतान करना संभव नहीं था।
· स्टेशन के बाहर कुछ बाइक राइडर्स यात्रियों से मोलभाव करते दिखे।
· बिहार जाने वाले एक परिवार की ट्रेन चार घंटे बाद थी, लेकिन वे भीड़ की आशंका से समय से पहले पहुँच गए थे—और अब उन्हें पता नहीं था कि ट्रेन चलेगी भी या नहीं।
आम जनता की परेशानी: बुज़ुर्ग, महिलाएँ और छोटे दुकानदार
बीबीसी संवाददाता जुगल पुरोहित ने साथी पत्रकार दीपक जसरोटिया के साथ नोएडा से जंतर-मंतर तक के सफ़र में देखा:
· अस्पतालों से लौट रहे बुज़ुर्ग, महिलाएँ और बच्चे बाहर खड़े थे, लेकिन उन्हें न ऑटो मिल रहे थे, न बसें।
· कुछ वरिष्ठ नागरिक डेढ़ घंटे से बस स्टॉप पर इंतज़ार कर रहे थे। उन्हें आशंका थी कि आगे 10-12 किलोमीटर पैदल चलना पड़ सकता है।
· छोटे दुकानदारों की दुकानें खुली थीं, लेकिन ग्राहक कम आ रहे थे—और जो आ रहे थे, उनके पास नक़द नहीं था। मोबाइल इंटरनेट बंद होने के कारण UPI से भुगतान नहीं हो पा रहा था।
जुगल ने सवाल उठाया कि प्रदर्शन के कारण आम लोगों को जिन मुश्किलों का सामना करना पड़ा, उन्हें दूर करने के लिए सरकार के पास क्या रणनीति और क्या जवाब है।
शाम तक जारी रहा प्रदर्शन
दिनभर की कार्रवाई के बावजूद शाम साढ़े पाँच बजे तक कनॉट प्लेस के आसपास प्रदर्शनकारी दिखाई देते रहे। वे छोटे-छोटे समूहों में पहुँचते, प्रदर्शन करते, और पुलिस के आने पर वहाँ से हट जाते।

दिल्ली पुलिस ने कुल कितने लोगों को हिरासत में लिया, इसकी आधिकारिक जानकारी बीबीसी को उस समय तक नहीं मिल पाई थी।