मुहर्रम जुलूस में ज़हरीले कैप्सूल बांटने की साज़िश को दो बहादुर महिलाओं ने ऐसे किया नाकाम :


Mumbai Muharram Heroines: इहलाम हमीदी और रुख़सार सैयद की सूझबूझ से 30,000 की भीड़ में ज़िंक फ़ॉस्फ़ाइड कैप्सूल बांटने की साज़िश नाकाम हुई। कॉलर पकड़कर आरोपी को दबोचा, फिर पुलिस को सौंपा। पढ़ें दो साधारण महिलाओं की असाधारण बहादुरी की पूरी कहानी।

मुंबई, 30 जून 2026: 26 जून की शाम मुंबई के भायखला इलाके में अंजीरवाड़ी से रहमत बाग क़ब्रिस्तान की ओर जा रहे मुहर्रम जुलूस में करीब 30,000 लोग शामिल थे। इसी भीड़ में एक व्यक्ति चूहे मारने के ज़हर (ज़िंक फ़ॉस्फ़ाइड) से भरे कैप्सूल बांट रहा था। अगर दो साधारण महिलाओं—इहलाम हमीदी और रुख़सार सैयद—की असाधारण सतर्कता न होती, तो यह रात एक भीषण त्रासदी में बदल सकती थी। इन्हीं दो महिलाओं ने आरोपी को मौके पर ही दबोच लिया और पुलिस को सौंपकर सैकड़ों ज़िंदगियाँ बचा लीं।

कौन हैं ये दो बहादुर महिलाएँ?

इहलाम हमीदी भायखला की रहने वाली हैं और कॉफ़ी का कारोबार करती हैं। रुख़सार सैयद मुंबई उपनगर में रहती हैं और कॉस्मेटिक उत्पादों की बिक्री का काम करती हैं। दोनों अच्छी दोस्त हैं और कई वर्षों से समाजसेवा से जुड़ी हुई हैं। मुहर्रम के जुलूस में ये दोनों वॉलंटियर के रूप में तैनात थीं।

कैसे हुआ पूरे मामले का खुलासा? – प्रत्यक्षदर्शियों की ज़ुबानी

कैप्सूल फेंक-फेंककर बांट रहा था’

इहलाम हमीदी ने बीबीसी मराठी को बताया, “वह व्यक्ति कैप्सूल फेंक-फेंककर बांट रहा था। इस तरह तबर्रुक (प्रसाद) नहीं बांटा जाता। इसलिए मुझे शक़ हुआ। उसकी फेंकी हुई एक कैप्सूल मेरे पैर के पास गिर गई। मैंने उसे खोलकर देखा तो उसमें काले रंग का पाउडर था और उसकी गंध बहुत तेज़ और अजीब थी।”

‘पैकेट पर कुछ साफ़ नहीं लिखा था’

रुख़सार सैयद ने बताया, “रात का समय था, इसलिए पैकेट पर क्या लिखा है, यह साफ़ दिख नहीं रहा था। इहलाम ने एक पैकेट हाथ में लिया तो उस पर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं थी। हमने गूगल पर खोजने की कोशिश की, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली। तब हमें यक़ीन हो गया कि यह कुछ ख़तरनाक है।”

‘मैंने उसकी कॉलर पकड़ ली’

रुख़सार आगे बताती हैं, “वह व्यक्ति हमारे सामने ही था और वहाँ से जाने लगा था। हमने उसे रोक लिया। उसके हाथ में नीले रंग का बड़ा बैग था, जिसमें बहुत सारे कैप्सूल भरे थे। जब हमने उससे सवाल किया तो वह घबरा गया। उसके साथ दो और लोग भी थे। मैंने उसकी कॉलर पकड़ ली और तुरंत पुलिस को सूचना दी।”

‘हमने लोगों से कैप्सूल वापस मंगवाए’

इहलाम ने बताया, “हमने तुरंत जुलूस में ऐलान करवाया कि कोई भी इन कैप्सूलों का सेवन न करें। फिर स्वयंसेवकों की मदद से लोगों से वे कैप्सूल इकट्ठा किए और पुलिस के हवाले कर दिए। यह पूरा घटनाक्रम करीब 20 मिनट तक चला।”

पुलिस जाँच में क्या सामने आया?

मौके पर बुलाई गई भायखला पुलिस ने आरोपी फ़ैयाज़ निसार प्रेमजी (39) को गिरफ्तार कर लिया। वह पुणे के विमान नगर का रहने वाला है और पेंट का कारोबार करता है।

जाँच के मुख्य निष्कर्ष:

· बरामदगी: आरोपी के पास से 14,900 ज़हरीले कैप्सूल जब्त किए गए।
· ज़हर की मात्रा: उसने 50 किलोग्राम ज़िंक फ़ॉस्फ़ाइड खरीदा था।
· कैप्सूल की संख्या: 30,000 खाली कैप्सूल ऑनलाइन मँगवाए गए थे।
· साज़िश की अवधि: वह पिछले 15 दिनों से मुंबई के एक होटल में रुककर कैप्सूल भर रहा था।
· मकसद: पुलिस के अनुसार, अभियुक्त ने स्वीकार किया कि उसका लक्ष्य जुलूस को निशाना बनाकर बड़े पैमाने पर नुकसान पहुँचाना था।

मुंबई ज़ोन-1 के डीसीपी जयंत मीणा ने बताया, “मुंबई पुलिस की सतर्कता और इन महिलाओं की सूझबूझ से एक बड़ा हादसा टल गया। अभियुक्त के ख़िलाफ़ बीएनएस की धारा 109, 110 और 123 के तहत मामला दर्ज किया गया है।”

चार लोगों की बिगड़ी तबीयत, अस्पताल में चल रहा इलाज

इन कैप्सूलों का सेवन करने वाले अब तक चार लोगों के मामले सामने आए हैं। सभी की हालत स्थिर है।

सलमान सैयद (शिवाजीनगर निवासी):

“जुलूस के दौरान कमज़ोरी लग रही थी, इसलिए मैंने एक कैप्सूल ले लिया। कुछ देर बाद उल्टी और बेचैनी शुरू हो गई। लोगों ने मुझे हबीब अस्पताल में भर्ती कराया।”

सैयद अब्बास:

“एक व्यक्ति ने यह कैप्सूल मुझे विटामिन-सी की गोली बताकर दिया। उसने कहा कि इसे बच्चे से लेकर बुज़ुर्ग तक सभी ले सकते हैं। लेकिन कुछ ही देर में मेरी तबीयत बिगड़ गई।”

पुलिस ने की महिलाओं की सराहना

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, “इन सतर्क महिला नागरिकों ने तुरंत जानकारी दी और बिना डरे आरोपी को पकड़ लिया। इनकी वजह से एक बड़ा हादसा टल गया। यह नागरिक कर्तव्य की मिसाल है।”

आगे की जाँच

· आरोपी को 28 जून को अदालत में पेश किया गया, जहाँ से उसे दो दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया।
· पुलिस इस बात की जाँच कर रही है कि क्या आरोपी ने अकेले काम किया या इसमें अन्य लोग भी शामिल थे।
· आरोपी के विदेश यात्रा संबंधों और डिजिटल सबूतों की भी जाँच की जा रही है।
· समुदाय के कुछ लोगों ने बताया कि हाल के दिनों में आरोपी का सामाजिक संपर्क कम हो गया था।

एक सबक और प्रेरणा

इहलाम हमीदी और रुख़सार सैयद की यह कहानी सिर्फ़ एक घटना नहीं, बल्कि इस बात का प्रमाण है कि आम नागरिकों की सतर्कता और साहस कितनी बड़ी त्रासदियों को रोक सकता है। ऐसे समय में जब समाज में नफरत और विभाजन की राजनीति गहरा रही है, ये दो महिलाएँ उम्मीद की किरण बनकर उभरी हैं।

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